ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिखलाये
कभी खुशियों की बारिश कभी गम के साये
कभी तलाब के पानी की तरह शांत थी ज़िन्दगी
कभी तेज़ समुंदर सी लहरों में हम नाहये
ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिह्क्लाये
कभी सोये हम मां के आंचल तले
कभी घने बादलों के साये में तनहा चले
ये ज़िन्दगी और पता नहीं क्या क्या रंग दिखलाएगी
हम भी इस ज़िन्दगी की राहों पे तनहा चल चले
ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिह्क्लाये
कभी खुशियों की बारिश कभी गम के साये
philosophy.. dude !! nice
ReplyDeleteये ज़िन्दगी और पता नहीं क्या क्या रंग दिखलाएगी...
ReplyDeleteकभी ह्येद्राबाद की बिरयानी तो कभी इन्द्रपुरम के परांठे खिलाएगी