Sunday, January 24, 2010

ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिखलाये

ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिखलाये

कभी खुशियों की बारिश कभी गम के साये

कभी तलाब के पानी की तरह शांत थी ज़िन्दगी

कभी तेज़ समुंदर सी लहरों में हम नाहये

ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिह्क्लाये

कभी सोये हम मां के आंचल तले

कभी घने बादलों के साये में तनहा चले

ये ज़िन्दगी और पता नहीं क्या क्या रंग दिखलाएगी

हम भी इस ज़िन्दगी की राहों पे तनहा चल चले

ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिह्क्लाये

कभी खुशियों की बारिश कभी गम के साये

2 comments:

  1. ये ज़िन्दगी और पता नहीं क्या क्या रंग दिखलाएगी...
    कभी ह्येद्राबाद की बिरयानी तो कभी इन्द्रपुरम के परांठे खिलाएगी

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