Saturday, January 23, 2010

आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर

आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
आगे पीछे मैंने दोडाई अपनी ये नज़र
ये रास्ता मुझे जिंदगी सा लगा
पीछे थी हमारे कुछ खुशियाँ कुछ यादें
आगे था हमारा जिंदगी का सफ़र
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
काश उस रास्ते पे जैसे मैं वापस जा सकता था
अपने पीछे छुटी चीज़े ला सकता था
काश मैं कर सकता अपनी जिंदगी में भी ये
शायद में जिंदगी में पीछे जाके अपने गम मिटा सकता था
आज मैं निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
वो पुरानी यादें आ गयीं कहीं हमें नज़र
वो माँ का बुलाना वो दोस्तों का गुदगुदाना
पर खिंच लाया हमें दूर इन से ये ज़िन्दगी का सफ़र
आज मै निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
रास्ते पर चलते जैसे जैसे मैं थक रहा था
ये रास्ता मुझे ज़िन्दगी सा लग रहा था
क्योंकि बड़ते बड़ते मुझे ये अहसास हुआ
की मैं ज़िन्दगी में भी रास्ते की तरह थक रहा था
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर

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