Sunday, January 24, 2010

कल रात वो मेरे सपने में आई

कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उसकी आँखों में हया की कसक थी
उसकी नज़रें भी थीं थोड़ी घबराई
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उसको देख के लगा की मेरी आँख न खुले
ये रात न रुके बदती ही चले
सुबह का सूरज आज थम जाए
और ये रात कभी न ढले
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उनको बोलना चाहते थे हम अपने दिल की बात
सब बता देना चाहते थे आज रात
डर था कल कह सकेंगे या नहीं
कहीं दिल में ही न रह जाये ये बात
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
हम तो सपने भी उनसे कहने की हिम्मत जुटा न सके
उनकी चहरे से अपनी नज़रें हटा न सके
उनको देखते देखते सारी रात कट गयी
हम अपने आपको इस गम से छुटा न सके
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
रात ढल गयी हो गया सवेरा
सामने था मेरे नया दिन मेरा
मैं उठा थोडा सा मुस्कराया
क्योंकि मेरी आँखों में था उनकी तस्वीर का बसेरा
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई

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