पास होके भी वो पास नहीं होता
साथ होके भी वो साथ नहीं होता
इस रिश्ते को मैं क्या नाम दूँ
जिसमे ख़ुशी होके भी उसका अहसास नहीं होता
Monday, April 9, 2012
Wednesday, January 11, 2012
खुद को ही खो दिया
हँसाने चले थे किसी को
आज खुद की आँखों ने रो दिया
पाने चले थे किसी को
हमने तो खुद को ही खो दिया
आज खुद की आँखों ने रो दिया
पाने चले थे किसी को
हमने तो खुद को ही खो दिया
Wednesday, January 4, 2012
कोई अरमान था दिल में
आज लगता है कुछ टूटके बिखर गया है
कोई अरमान था दिल में जो मर गया है
न तो उनकी बहुत पहले से थी
पर आज दिल ये मानके डर गया है
कोई अरमान था दिल में जो मर गया है
न तो उनकी बहुत पहले से थी
पर आज दिल ये मानके डर गया है
हर पल जीना एक सजा है
वो मेरे लिए ख़ुशी की वजह है
उसके साथ हर पल में एक मजा है
पर वो नहीं जानती की उसकी ना ने क्या किया है
अब तो हर पल जीना लगता एक सजा है
उसके साथ हर पल में एक मजा है
पर वो नहीं जानती की उसकी ना ने क्या किया है
अब तो हर पल जीना लगता एक सजा है
Wednesday, December 28, 2011
कौन जाना चाहता है किनारों पे
कौन जाना चाहता है किनारों पे
बैठके इन अन्छाही पतवारो पे
हमें तो मजा आता है इस समुंदर की
तेज डरावनी मझ्दारों पे
बैठके इन अन्छाही पतवारो पे
हमें तो मजा आता है इस समुंदर की
तेज डरावनी मझ्दारों पे
समाज एक मजबूरी
समाज के साथ जीना भी एक मजबूरी है
क्योंकि इसके बिना भी ज़िन्दगी भी अधूरी है
चाहते नहीं उनसे दूर रहना जरा भी
पर फिर भी रखनी पड़ती ये दूरी है
क्योंकि इसके बिना भी ज़िन्दगी भी अधूरी है
चाहते नहीं उनसे दूर रहना जरा भी
पर फिर भी रखनी पड़ती ये दूरी है
तेरा जाना सोच भी नहीं सकते
तेरे जाने के बारे में सोच कर भी दिल घबराता है
जाने हमें ये क्या बताता है
तू चली जाएगी इतनी सी बात से भी
ये दिल डर के मारे काँप जाता है
जाने हमें ये क्या बताता है
तू चली जाएगी इतनी सी बात से भी
ये दिल डर के मारे काँप जाता है
तेरा दर्द सिर्फ तेरा है
मान ले तू उसका कोई नहीं है
तेरी तन्हाई अभी सोई नहीं है
तेरे दर्द के लिए तेरे अलावा
कोई आँख रोई नहीं है
तेरी तन्हाई अभी सोई नहीं है
तेरे दर्द के लिए तेरे अलावा
कोई आँख रोई नहीं है
उनके दीदार को तडपते हैं
वो करते ही नहीं हमसे प्यार
है नहीं उन्हें हमारा ऐतबार
पर हम खो चुके हैं दिल अपना
तडपते हैं जब होता नहीं उनका दीदार
है नहीं उन्हें हमारा ऐतबार
पर हम खो चुके हैं दिल अपना
तडपते हैं जब होता नहीं उनका दीदार
खुली आँखों से सो रहे हैं
आज कल खुली आँखों से सो रहे हैं
जाने हम किसके लिए रो रहे हैं
जब वो हमें चाहते ही नहीं
फिर क्यूँ लगता है हम कुछ खो रहे हैं
जाने हम किसके लिए रो रहे हैं
जब वो हमें चाहते ही नहीं
फिर क्यूँ लगता है हम कुछ खो रहे हैं
Tuesday, December 27, 2011
मुमकिन नहीं भुला पाना
अब मुमकिन नहीं तुझे भुला पाना
तेरे बिना एक पल भी बिता पाना
अब पता नहीं क्या करूँगा ज़िनदगी में
क्योंकि मुझे नहीं आता खुद को इस प्यार से छूटा पाना
तेरे बिना एक पल भी बिता पाना
अब पता नहीं क्या करूँगा ज़िनदगी में
क्योंकि मुझे नहीं आता खुद को इस प्यार से छूटा पाना
उसकी जुदाई
मुझे तडपता छोड़ दिया उसने
मुझे अंदर तक तोड़ दिया उसने
पर वो एक दिन जानेगी उसने क्या खोया है
भले ही आज रास्ता मोड़ दिया उसने
मुझे अंदर तक तोड़ दिया उसने
पर वो एक दिन जानेगी उसने क्या खोया है
भले ही आज रास्ता मोड़ दिया उसने
Wednesday, September 1, 2010
ज़िन्दगी में चलते चलते एक बात समझ में आई
ज़िन्दगी में चलते चलते एक बात समझ में आई
जीवन के हर एक पल में ख़ुशी है समाई
जो जी लेता इस पल को भरपूर
उसे हर पल देता ख़ुशी और बधाई
जीवन के हर एक पल में ख़ुशी है समाई
जो जी लेता इस पल को भरपूर
उसे हर पल देता ख़ुशी और बधाई
Tuesday, August 10, 2010
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
कभी ज़ख्मों में हसंया
कभी बिना ज़ख्मों के रुलाया
कभी हम हसते रहे बेवजह
कभी वज़ह में भी हसना ना आया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
कभी हमारा वक़्त कटता ही नहीं
कभी वक़्त की कमी ने रुलाया
कभी अपनों में प्यार ना दिखा
कभी ये प्यार बेगानों में नज़र आया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
कभी ज़ख्मों में हसंया
कभी बिना ज़ख्मों के रुलाया
कभी हम हसते रहे बेवजह
कभी वज़ह में भी हसना ना आया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
कभी हमारा वक़्त कटता ही नहीं
कभी वक़्त की कमी ने रुलाया
कभी अपनों में प्यार ना दिखा
कभी ये प्यार बेगानों में नज़र आया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
Thursday, February 11, 2010
उनकी पहल का इंतज़ार
हम तो उनकी पहल का इंतज़ार करते रहे
उनका बस सपनो में दीदार करते रहे
वो आये ही नहीं कभी हमारे करीब
हम इंतज़ार के इस समुन्दर को आंसुओं से भरते रहे
उनका बस सपनो में दीदार करते रहे
वो आये ही नहीं कभी हमारे करीब
हम इंतज़ार के इस समुन्दर को आंसुओं से भरते रहे
Wednesday, January 27, 2010
वो यादों के साथ आ गयी
आज तनहाई में बैठे बैठे उनकी याद आ गयी
आँखों के आगे फिर वो पुरानी बात आ गयी
पर उनकी यादों से तनहाई कुछ कम लगने लगी
ऐसा लगा जैसे वो इन यादों के साथ आ गयी
आँखों के आगे फिर वो पुरानी बात आ गयी
पर उनकी यादों से तनहाई कुछ कम लगने लगी
ऐसा लगा जैसे वो इन यादों के साथ आ गयी
Monday, January 25, 2010
ज़िन्दगी से कोई गिला नहीं
ज़िन्दगी से हमें कुछ मिला नहीं
ज़िन्दगी में कोई फूल हमारा खिला नहीं
पर शायद ज़िन्दगी से उम्मीद करना ही बेमानी थी
इस लिए हमें ज़िन्दगी से कोई गिला नहीं
ज़िन्दगी में कोई फूल हमारा खिला नहीं
पर शायद ज़िन्दगी से उम्मीद करना ही बेमानी थी
इस लिए हमें ज़िन्दगी से कोई गिला नहीं
Sunday, January 24, 2010
ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिखलाये
ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिखलाये
कभी खुशियों की बारिश कभी गम के साये
कभी तलाब के पानी की तरह शांत थी ज़िन्दगी
कभी तेज़ समुंदर सी लहरों में हम नाहये
ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिह्क्लाये
कभी सोये हम मां के आंचल तले
कभी घने बादलों के साये में तनहा चले
ये ज़िन्दगी और पता नहीं क्या क्या रंग दिखलाएगी
हम भी इस ज़िन्दगी की राहों पे तनहा चल चले
ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिह्क्लाये
कभी खुशियों की बारिश कभी गम के साये
कल रात वो मेरे सपने में आई
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उसकी आँखों में हया की कसक थी
उसकी नज़रें भी थीं थोड़ी घबराई
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उसको देख के लगा की मेरी आँख न खुले
ये रात न रुके बदती ही चले
सुबह का सूरज आज थम जाए
और ये रात कभी न ढले
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उनको बोलना चाहते थे हम अपने दिल की बात
सब बता देना चाहते थे आज रात
डर था कल कह सकेंगे या नहीं
कहीं दिल में ही न रह जाये ये बात
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
हम तो सपने भी उनसे कहने की हिम्मत जुटा न सके
उनकी चहरे से अपनी नज़रें हटा न सके
उनको देखते देखते सारी रात कट गयी
हम अपने आपको इस गम से छुटा न सके
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
रात ढल गयी हो गया सवेरा
सामने था मेरे नया दिन मेरा
मैं उठा थोडा सा मुस्कराया
क्योंकि मेरी आँखों में था उनकी तस्वीर का बसेरा
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उसकी आँखों में हया की कसक थी
उसकी नज़रें भी थीं थोड़ी घबराई
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उसको देख के लगा की मेरी आँख न खुले
ये रात न रुके बदती ही चले
सुबह का सूरज आज थम जाए
और ये रात कभी न ढले
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उनको बोलना चाहते थे हम अपने दिल की बात
सब बता देना चाहते थे आज रात
डर था कल कह सकेंगे या नहीं
कहीं दिल में ही न रह जाये ये बात
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
हम तो सपने भी उनसे कहने की हिम्मत जुटा न सके
उनकी चहरे से अपनी नज़रें हटा न सके
उनको देखते देखते सारी रात कट गयी
हम अपने आपको इस गम से छुटा न सके
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
रात ढल गयी हो गया सवेरा
सामने था मेरे नया दिन मेरा
मैं उठा थोडा सा मुस्कराया
क्योंकि मेरी आँखों में था उनकी तस्वीर का बसेरा
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
Saturday, January 23, 2010
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
आगे पीछे मैंने दोडाई अपनी ये नज़र
ये रास्ता मुझे जिंदगी सा लगा
पीछे थी हमारे कुछ खुशियाँ कुछ यादें
आगे था हमारा जिंदगी का सफ़र
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
काश उस रास्ते पे जैसे मैं वापस जा सकता था
अपने पीछे छुटी चीज़े ला सकता था
काश मैं कर सकता अपनी जिंदगी में भी ये
शायद में जिंदगी में पीछे जाके अपने गम मिटा सकता था
आज मैं निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
वो पुरानी यादें आ गयीं कहीं हमें नज़र
वो माँ का बुलाना वो दोस्तों का गुदगुदाना
पर खिंच लाया हमें दूर इन से ये ज़िन्दगी का सफ़र
आज मै निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
रास्ते पर चलते जैसे जैसे मैं थक रहा था
ये रास्ता मुझे ज़िन्दगी सा लग रहा था
क्योंकि बड़ते बड़ते मुझे ये अहसास हुआ
की मैं ज़िन्दगी में भी रास्ते की तरह थक रहा था
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
आगे पीछे मैंने दोडाई अपनी ये नज़र
ये रास्ता मुझे जिंदगी सा लगा
पीछे थी हमारे कुछ खुशियाँ कुछ यादें
आगे था हमारा जिंदगी का सफ़र
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
काश उस रास्ते पे जैसे मैं वापस जा सकता था
अपने पीछे छुटी चीज़े ला सकता था
काश मैं कर सकता अपनी जिंदगी में भी ये
शायद में जिंदगी में पीछे जाके अपने गम मिटा सकता था
आज मैं निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
वो पुरानी यादें आ गयीं कहीं हमें नज़र
वो माँ का बुलाना वो दोस्तों का गुदगुदाना
पर खिंच लाया हमें दूर इन से ये ज़िन्दगी का सफ़र
आज मै निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
रास्ते पर चलते जैसे जैसे मैं थक रहा था
ये रास्ता मुझे ज़िन्दगी सा लग रहा था
क्योंकि बड़ते बड़ते मुझे ये अहसास हुआ
की मैं ज़िन्दगी में भी रास्ते की तरह थक रहा था
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
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