shayari
Wednesday, December 28, 2011
समाज एक मजबूरी
समाज के साथ जीना भी एक मजबूरी है
क्योंकि इसके बिना भी ज़िन्दगी भी अधूरी है
चाहते नहीं उनसे दूर रहना जरा भी
पर फिर भी रखनी पड़ती ये दूरी है
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