Thursday, February 11, 2010

उनकी पहल का इंतज़ार

हम तो उनकी पहल का इंतज़ार करते रहे
उनका बस सपनो में दीदार करते रहे
वो आये ही नहीं कभी हमारे करीब
हम इंतज़ार के इस समुन्दर को आंसुओं से भरते रहे

Wednesday, January 27, 2010

वो यादों के साथ आ गयी

आज तनहाई में बैठे बैठे उनकी याद आ गयी
आँखों के आगे फिर वो पुरानी बात आ गयी
पर उनकी यादों से तनहाई कुछ कम लगने लगी
ऐसा लगा जैसे वो इन यादों के साथ आ गयी

Monday, January 25, 2010

ज़िन्दगी से कोई गिला नहीं

ज़िन्दगी से हमें कुछ मिला नहीं
ज़िन्दगी में कोई फूल हमारा खिला नहीं
पर शायद ज़िन्दगी से उम्मीद करना ही बेमानी थी
इस लिए हमें ज़िन्दगी से कोई गिला नहीं

Sunday, January 24, 2010

ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिखलाये

ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिखलाये

कभी खुशियों की बारिश कभी गम के साये

कभी तलाब के पानी की तरह शांत थी ज़िन्दगी

कभी तेज़ समुंदर सी लहरों में हम नाहये

ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिह्क्लाये

कभी सोये हम मां के आंचल तले

कभी घने बादलों के साये में तनहा चले

ये ज़िन्दगी और पता नहीं क्या क्या रंग दिखलाएगी

हम भी इस ज़िन्दगी की राहों पे तनहा चल चले

ज़िन्दगी हमे क्या क्या रंग दिह्क्लाये

कभी खुशियों की बारिश कभी गम के साये

कल रात वो मेरे सपने में आई

कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उसकी आँखों में हया की कसक थी
उसकी नज़रें भी थीं थोड़ी घबराई
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उसको देख के लगा की मेरी आँख न खुले
ये रात न रुके बदती ही चले
सुबह का सूरज आज थम जाए
और ये रात कभी न ढले
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
उनको बोलना चाहते थे हम अपने दिल की बात
सब बता देना चाहते थे आज रात
डर था कल कह सकेंगे या नहीं
कहीं दिल में ही न रह जाये ये बात
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
हम तो सपने भी उनसे कहने की हिम्मत जुटा न सके
उनकी चहरे से अपनी नज़रें हटा न सके
उनको देखते देखते सारी रात कट गयी
हम अपने आपको इस गम से छुटा न सके
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई
रात ढल गयी हो गया सवेरा
सामने था मेरे नया दिन मेरा
मैं उठा थोडा सा मुस्कराया
क्योंकि मेरी आँखों में था उनकी तस्वीर का बसेरा
कल रात वो मेरे सपने में आई
थोडा हसीं थोडा शरमाई

Saturday, January 23, 2010

आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर

आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
आगे पीछे मैंने दोडाई अपनी ये नज़र
ये रास्ता मुझे जिंदगी सा लगा
पीछे थी हमारे कुछ खुशियाँ कुछ यादें
आगे था हमारा जिंदगी का सफ़र
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
काश उस रास्ते पे जैसे मैं वापस जा सकता था
अपने पीछे छुटी चीज़े ला सकता था
काश मैं कर सकता अपनी जिंदगी में भी ये
शायद में जिंदगी में पीछे जाके अपने गम मिटा सकता था
आज मैं निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
वो पुरानी यादें आ गयीं कहीं हमें नज़र
वो माँ का बुलाना वो दोस्तों का गुदगुदाना
पर खिंच लाया हमें दूर इन से ये ज़िन्दगी का सफ़र
आज मै निकला घर से पहुंचा रास्ते पर
रास्ते पर चलते जैसे जैसे मैं थक रहा था
ये रास्ता मुझे ज़िन्दगी सा लग रहा था
क्योंकि बड़ते बड़ते मुझे ये अहसास हुआ
की मैं ज़िन्दगी में भी रास्ते की तरह थक रहा था
आज निकला घर से पहुंचा रास्ते पर

मन हम से कहता है

ये मन आज कल हम से कहता है
तेरे सीने में एक तनहा दिल रहता है
जो कभी हसता था गुनगुनता था
आज वो प्यार में पता नहीं कैसे कैसे गम सहता है