Wednesday, December 28, 2011

तेरा दर्द सिर्फ तेरा है

मान ले तू उसका कोई नहीं है
तेरी तन्हाई अभी सोई नहीं है
तेरे दर्द के लिए तेरे अलावा
कोई आँख रोई नहीं है

उनके दीदार को तडपते हैं

वो करते ही नहीं हमसे प्यार
है नहीं उन्हें हमारा ऐतबार
पर हम खो चुके हैं दिल अपना
तडपते हैं जब होता नहीं उनका दीदार

खुली आँखों से सो रहे हैं

आज कल खुली आँखों से सो रहे हैं
जाने हम किसके लिए रो रहे हैं
जब वो हमें चाहते ही नहीं
फिर क्यूँ लगता है हम कुछ खो रहे हैं

Tuesday, December 27, 2011

मुमकिन नहीं भुला पाना

अब मुमकिन नहीं तुझे भुला पाना
तेरे बिना एक पल भी बिता पाना
अब पता नहीं क्या करूँगा ज़िनदगी में
क्योंकि मुझे नहीं आता खुद को इस प्यार से छूटा पाना

उसकी जुदाई

मुझे तडपता छोड़ दिया उसने
मुझे अंदर तक तोड़ दिया उसने
पर वो एक दिन जानेगी उसने क्या खोया है
भले ही आज रास्ता मोड़ दिया उसने

Wednesday, September 1, 2010

ज़िन्दगी में चलते चलते एक बात समझ में आई

ज़िन्दगी में चलते चलते एक बात समझ में आई
जीवन के हर एक पल में ख़ुशी है समाई
जो जी लेता इस पल को भरपूर
उसे हर पल देता ख़ुशी और बधाई

Tuesday, August 10, 2010

ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया

ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
कभी ज़ख्मों में हसंया
कभी बिना ज़ख्मों के रुलाया
कभी हम हसते रहे बेवजह
कभी वज़ह में भी हसना ना आया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
कभी हमारा वक़्त कटता ही नहीं
कभी वक़्त की कमी ने रुलाया
कभी अपनों में प्यार ना दिखा
कभी ये प्यार बेगानों में नज़र आया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया
ज़िन्दगी ने हमें क्या क्या रंग दिखलाया